सोमवार, फ़रवरी 13, 2006

जब किसी से कोई गिला रखना


जब किसी से कोई गिला रखना ,
सामने अपने आइना रखना ।
यूं उजालो से वास्ता रखना ,
शम्मा के पास ही हवा रखना ।

घर की तामीर चाहे जैसी हो ,
इस में रोने की कुछ जगह रखना ।

मस्जिदें है नमाजियों के लिये ,
अपने घर में कहीं खुदा रखना ।

मिलना जुलना अगर जरूरी हो ,
मिलने जुलने का हौसला रखना ।

-निदा फाजली