दिल के खुश रखने को
The beauty of Gazal lies in its wording. Sometimes I don't understand few words and that spoils the pleasure. There are lot of Gazals from legend Mirza Galib that I dont understand. But this gazal is very simple. The beauty of this Gazal inspires me to learn Urdu. As always its again sung by Jagjit Sigh. This Gazals feaures in his album named Mirage.
इक ब्राह्मन ने कहा है की येह साल अच्छा है
ज़ुल्म की रात बहुत जल्द ढलेगी अब तो
आग चुल्हों मे हर रोज जलेगी अब तो
भूख के मारे कोई बच्चा नही रोयेगा
चैन की नींद हर इक शख्श यहां सोयेगा
आंधी नफरत की चलेगी ना कहीँ अब के बरस
प्यार की फस्ल उगायेगी ज़मीन अब के बरस
है यकीन अब ना कोई शोर शराबा होगा
ज़ुल्म होगा ना कहीं ख़ून खराबा होगा
ओस और धूप के सदमें ना सहेगा कोई
अब मेरे देश मे बेघर ना रहेगा कोई
नये वादों का जो डाला है जाल अच्छा है
रहनुमाओं ने कहा है की येह साल अच्छा है
दिल के खुश रखने को ग़ालिब येह ख्याल अच्छा है
दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब येह ख्याल अच्छा है


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