तेरे खुशबु में बसें ख़त
There are few gazals which will tear my heart apart. This is one of them. Each line makes a deep impact and hits the inner core. The gazal is penned by Rajendranath Rahbar, and is being sung by Jagjit Singh.
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे
प्यार में डूबे हुए ख़त मै जलाता कैसे
तेरे हाथो के लिखे ख़त मै जलाता कैसे
जिनको दुनिया कि निगाहों से छुपाये रक्खा
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रक्खा
दीन जिनको जिन्हे ईमान बनाए रक्खा
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे
जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह
याद थे मुझको जो पैगामें ज़ुबानी की तरह
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे
तुने दुनिया कि निगाहों से जो बच कर लिक्खे
साल हा साल मेरे नाम बराबर लिक्खे
कभी दिन में तो कभी रात को उठ्कर लिक्खे
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे
प्यार में डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे
तेरे हाथो के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे
तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ.
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ.
It is a very sad part that I dont have any other gazal by Rajendranath Rahbar. I did a lot of searching on internet with no luck. If any one of you have any other gazal from this poet, please share with me.


3 टिप्पणियां:
महोदय
श्री रहबर की अन्य रचनाओं के लिए कृप्या यहां देखें।
http://rehbarsaheb.blogspot.com/
सादर
रवि कांत अनमोल
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