उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
There are so many moments in my life where I would like to go back and relive those moments. Someone once said no matter how good or bad your past was, you will always love to remember those days. The poem below depicts the same feeling from author. The gazal is composed by Sudarshan Faakir and is beautifully sung by Jagjit and Chitra Singh.
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी
ले कर चले थे हम जिन्हे, जन्नत के ख्वाब थे
फूलो के ख्वाब थे वोह मुहब्बत के ख़्वाब थे
लेकिन कहां है इनमे वोह पहले सी दिलकशी
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी
रहते थे हम हशीन खयालो कि भीड़ में
उलझे हुए हैं आज सवालो कि भीड़ में
आने लगी है याद वोह फुरसत कि हर घड़ी
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी
शायद यह वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया
अश्कोँ कि चांदनी से थी बेहतर वोह धुप ही
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी


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