रविवार, मई 20, 2007

तेरे खुशबु में बसें ख़त

There are few gazals which will tear my heart apart. This is one of them. Each line makes a deep impact and hits the inner core. The gazal is penned by Rajendranath Rahbar, and is being sung by Jagjit Singh.

तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे
प्यार में डूबे हुए ख़त मै जलाता कैसे
तेरे हाथो के लिखे ख़त मै जलाता कैसे

जिनको दुनिया कि निगाहों से छुपाये रक्खा
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रक्खा
दीन जिनको जिन्हे ईमान बनाए रक्खा
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे

जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह
याद थे मुझको जो पैगामें ज़ुबानी की तरह
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे

तुने दुनिया कि निगाहों से जो बच कर लिक्खे
साल हा साल मेरे नाम बराबर लिक्खे
कभी दिन में तो कभी रात को उठ्कर लिक्खे
तेरे खुशबु में बसें ख़त मै जलाता कैसे

प्यार में डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे
तेरे हाथो के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे
तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ.
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ.

It is a very sad part that I dont have any other gazal by Rajendranath Rahbar. I did a lot of searching on internet with no luck. If any one of you have any other gazal from this poet, please share with me.

सोमवार, मई 14, 2007

ए काश वो किसी दिन

This is a beautiful poem by Yogesh. The gazal is sung by Jagjit Singh and is part of one of his album called Many Facets. The is from a movie called "Hum Hain Pyar Mein". Though the movie was not at all hit, but its music was melodious, specially this song.

काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें,
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बतायें |

लगता है डर उन्हें तो हमराज़ लेके आयें,
जो पूछना है पूछे, कहना है जो सुनाएँ,
तौबा हमारी हम जो उन्हें हाथ भी लगाएँ |

काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें,
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बतायें|

उन्हें इश्क ग़र ना होता पलके नही झुकाते,
गालों पे सोख बादल, जुल्फो के ना गिरते,
कर दे ना क़त्ल हमको मासूम यह अदाएँ|

काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें,
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बतायें|

शुक्रवार, मई 04, 2007

उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी

There are so many moments in my life where I would like to go back and relive those moments. Someone once said no matter how good or bad your past was, you will always love to remember those days. The poem below depicts the same feeling from author. The gazal is composed by Sudarshan Faakir and is beautifully sung by Jagjit and Chitra Singh.


उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी

ले कर चले थे हम जिन्हे, जन्नत के ख्वाब थे
फूलो के ख्वाब थे वोह मुहब्बत के ख़्वाब थे
लेकिन कहां है इनमे वोह पहले सी दिलकशी
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी

रहते थे हम हशीन खयालो कि भीड़ में
उलझे हुए हैं आज सवालो कि भीड़ में
आने लगी है याद वोह फुरसत कि हर घड़ी
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी

शायद यह वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया
अश्कोँ कि चांदनी से थी बेहतर वोह धुप ही
उस मोड से शुरू करें फिर यह जिन्दगी
हर शय जहां हशीन थी हम तुम थे अजनबी

गुरुवार, मई 03, 2007

कभी यूं भी तो हो

Another melody by Jagjit Singh. This is pened by Javed Akhtar.

कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो
दरिया का साहिल हो,
पुरे
चांद कि रात हो,
और
तुम आओ
कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो

परियों कि महफ़िल हो,
कोई
तुम्हारी बात हो,
और
तुम आओ
कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो

यह नरम मुलायम ठण्डी हवायें,
जब
घर से तुम्हारे गुजरे,
तुम्हारी
खूस्बू चुराएँ,
मेरे घर ले आंये,
कभी
यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो

सूनी हर महफ़िल हो,
कोई
ना मेरे साथ हो,
और तुम आओ.
कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो

यह बादल ऐसे टूट के बरसे,
मेरे
दिल कि तरह मिलने को,
तुम्हारा
दिल भी तरसे,
तुम निकलो घर से,
कभी
यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो

तनहाई हो दिल हो,
बुद्ने हो बरसात हो,
और
तुम आओ.
कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो
दरिया का साहिल हो,
पूरे
चांद कि रात हो,
और
तुम आओ
कभी यूं भी तो हो,
कभी
यूं भी तो हो



तुम इतना जो मुश्कुरा रहे हो

This song is taken from movie Arth. Here poet is trying to represent the dilemma of a bleeding heart. Its crying inside but there is someting else on the face. Somebody once said in this world nothing is being taken at its face value. It has to be polished and it has to be what its not.

तुम इतना जो मुश्कुरा रहे हो
क्या गम है जिसको छिपा रहे हो

आंखों में नमी, हसीं लाबो पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो

बन जायेंगे जहर पीते पीते
यह अश्क जो पीते जा रहे हो

जिन जख्मों को वक़्त भर चला है
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो

रेखाओं का खेल है मुकद्दर
रेखाओं से मात खा रहे हों

देर लगी आने मने तुमको

Another gem by the living legend. The gazal is penned by Andleeb Shadani.

देर लगी आने में तुमको, शुकर है फिर भी आये तो
आश ने दिल का साथ ना छोडा, वैसे हम घबराए तो .

सफक, धनुक, महताब, घ्टअय्ने, तारे, नगमें, बिजली, फूल.
उस दामन में क्या क्या कुछ है, वोह दामन हाथ में आये तो .

झूठ है सब तारीख हमेशा अपने को दोहराती है,
अच्छा मेरा खाबे जवानी, थोडा सा दोहराये तो .

सुनी सुनाई बात नही है अपने ऊपर बीती है,
फूल निकलते हैं शोलो से चाहत आग लगाए तो .

तेरे बारे मेन जब सोचा नही था

This is gazal composed by Miraz Faizabadi. This is included in many collection of Jagjit Singh, once of them is Saher.

तेरे बारे में जब सोचा नही था,
मैं तनहा था मगर इतना नही था |

तेरी तस्वीर से करता था बाते,
मेरे घर मे आइना नही था |

समंदर ने मुझे प्यासा ही रक्खा,
मैं जब सेहरा में था प्यासा नही था |

मनाने रूठने के खेल में हम,
बिछड जायेंगे येह सोचा नही था |

सुना है बंद कर ली उसने आंखें,
कई रातों से वोह सोया नही था |

तेरे बारे में जब सोचा नही था,
मैं तनहा था मगर इतना नही था |

बुधवार, मई 02, 2007

तुमने दिल की बात कह दी

Another beauty by Jagjit Singh, which makes heart moist.

तुमने दिल की बात कह दी, आज यह अच्छा हुआ,
हम तुम्ह्ने अपना समझते थे बड़ा धोखा हुआ |

जब भी हमने कुछ कहा उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते हैं बारहा ऐसा हुआ |

आपकी आंखो मे यह आंसू कहां से गए,
हम तो दीवाने हैं लेकिन आप को यह क्या हुआ |

अब किसी से क्या कहें इकबाल अपनी दास्त्ना
बस खुदा का शुक्र है जो हुआ अच्छा हुआ |

तुमने दिल की बात कह दी आज यह अच्छा हुआ,
हम तुम्ह्ने अपना समझते थे बड़ा धोखा हुआ |


तेरे आने कि जब ख़बर महके

This is one of my favorite Gazal sung jagjit singh and penned by Nawaz Deobandi.


तेरे आने कि जब ख़बर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

शाम महके तेरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहेर महके

रात भर सोचता रह तुझको
जह्नो दिल मेरे रात भर महके

याद आये तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाये तो नजर महके

वोह घड़ी दो घड़ी जहां बैठे
वोह जमी महके वोह सजर महके

तेरे आने कि जब ख़बर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके